बगीचे के फल inspirational short stories in hindi

एक व्यक्ति अपने गुरु जी के आश्रम में शिक्षा लेता था शिक्षा पूरी होने के बाद वोह अपने घर पर अपने मा बाप के पास आ जाता है,उसके पापा सोचते है की अब लड़का बड़ा हो गया है अब उसकी शादी करनी चाहिए,उसके पापा अपना विचार अपने लड़के के सामने प्रस्तुत करते है,तोह लड़का कहता है की में शादी नहीं करूँगा क्योकि संसार नाशवान है,इस संसार में सब कुछ नस्त हो जाता है फिर शादी करने से क्या होगा.

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उसकी ये बात सुनकर लड़के का बाप बहुत ही चिंतित हुआ,उसने सोचा क्यों ना अपने लड़के के गुरु के पास चलकर कुछ सलाह ली जाए,अगले दिन वोह गुरूजी के पास गए और कहने लगे की गुरूजी आपका शिष्य शादी करना नहीं चाहता है,वोह कहता है की ये संसार नाशवा है फिर इसमें शादी करने से क्या लाभ,इस संसार में सभी चीजे नस्त हो जाती है.इस पर गुरूजी कहने लगे की तेरे लड़के को कल मेरे पास लेकर आना,अगले दिन वोह बाप अपने बच्चे को गुरूजी के पास लेकर आये तोह गुरूजी शिष्य से कहते है-चलो आज घूमने चलते है,लड़का और उसका गुरु एक बगीचे के पास पहुचे,बगीचे के पास पहुचकर गुरूजी कहने लगे की जा और इस बगीचे में से कुछ फल खाने के लिए तोड़कर लेकर आ.
इसपर वोह शिष्य जाता है और उस बगीचे में से कुछ फल तोड़ने लगता है,उसी समय में बगीचे का मालिक उसे देख लेता और उस लड़के पर गुस्सा होते हुए एक कुल्हाड़ी लेकर उसकी ओर भागता है तोह वोह शिष्य उस बगीचे के पास उपस्थित गुरु के पास है पहुचता है और गुरूजी से कहता है की गुरूजी बचाओ मुझे,वोह व्यक्ति कुल्हाड़ी लेकर मेरे पीछे भाग रहा है तो इस पर वोह गुरूजी कहते है की ये संसार नाशवान है,तुम्हारा शरीर भी नाशवान है,अगर कुल्हाड़ी तुम पर पड़ भी जाए तोह क्या होगा,ये आत्मा तोह कभी नहीं मर सकती इसलिए भागने की क्या जरुरत है,वोह शिष्य अपने गुरु की कही हुयी बात समझ आ चुकी थी और उसने अपने पिता की कही हुयी शादी की बात मान ली,और शादी करने के लिए हा कह दिया.दोस्तों संसार नाशवान है इस वहाने से संसार के द्वारा प्राप्त जिम्मेदारी से भागिए मत और अपनी जिम्मेदारी निभाइए.

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