भारत की लोक कथाएँ-अंधे और लंगड़े की सोच

दोस्तों आज दुनिया में बहुत सारे बदलाव हो चुके हैं लेकिन सबसे बड़ा बदलाव हमारी सोच में हुआ है आज मैं आपको एक प्रेरणादायक भारत की लोक कथा सुनाने वाला हु,मुझे यकीन है कि जिसे पढ़कर आपके अंदर भी बदलाव आ सकता है दोस्तों काफी समय पहले की बात है दो व्यक्ति थे एक अंधा और दूसरा लंगडा.

भारत की लोक कथाएँ

उन दोनों में लड़ाई हो जाती है दोनों हमेशा एक दूसरे का बुरा करने के बारे में सोचते हैं अंधा सोचता है कि मैं इसका कुछ ऐसा कर दूँ जिससे ये लंगड़ा हो जाए और वहीं दूसरी ओर लंगडा सोचता है कि मैं इसका कुछ ऐसा कर दूं कि वह अंधा हो जाए,दोस्तों एक बार एक देवी को उन दोनों पर दया आ गई और वह उनके पास आई,सबसे पहले वह अंधे के पास गई और अंधे से कहा कि मुझसे तुम्हारी हालत देखी नहीं जाती तुम कुछ मांगो जो तुम मांगोगे वह मैं तुम्हें दूंगी.अंधा कुछ देर सोचकर उस देवी से बोला की देवी उस मेरे दुश्मन लंगडे को मेरी तरह अंधा बना दे.देवी ने सोचा की कैसा मौका था इसके पास फिर भी इसने मौका दूसरों के बारे में बुरा सोचने में गवा दिया.

फिर वह देवी उस लंगड़े के पास गई और उससे बोली कि मुझे तुम पर बहुत दया आती है तुम मुझसे जो चाहे मांगो तो उस लंगड़े ने कहा कि तुम मेरे दुश्मन अंधे को मेरी तरह लंगड़ा बना दो.

देवी ने उन दोनों को वरदान दे दिए और वह वहीं के वहीं रह गए,देवी उनका बड़ा भला करना चाहती थी लेकिन उन दोनों की बुरी आदतों के कारण उन्होंने अपने हाथ से सब कुछ खो दिया.

दोस्तों आज का इंसान ऐसा ही होता है,आज का इंसान खुद से ज्यादा दूसरों के बारे में सोचता है वह सोचता है कि मेरा अच्छा हो या ना हो दूसरे का बुरा जरूर हो,दोस्तों ये सोच बिल्कुल ही गलत है. हमें हमेशा दूसरों के बारे में अच्छा सोचना चाहिए और अगर हमारे पास एक ऐसा ही मौका आए तो उस मौके को हमें पहचानना चाहिए और कुछ ऐसा मांगना चाहिए जिससे हमारे जीवन में कुछ बड़ा हो जाए और कुछ अच्छा हो जाए.

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