नेत्रहीन व्यक्ति कैसे बने अमीर “Bhavesh bhatia life story in hindi”

हेलो दोस्तों कैसे हो आप,आज की हमारी पोस्ट Bhavesh bhatia life story in hindi एक बहुत ही प्रेरणादायक इंसान के बारे में है,इस
शख्स की स्टोरी को पढ़कर वाकई में आप में भी कुछ कर गुजरने का जोश और जुनून उत्पन्न होगा,दोस्तों दुनिया में लोग तो बहुत होते हैं लेकिन जो अपनी बड़ी सोच से जो अपनी लगातार की हुई मेहनत से दुनिया में कुछ करते हैं,वह कुछ गिने चुने लोग होते हैं,
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दोस्तों आज हम आप सभी को बताने वाले हैं उस इंसान के बारे में जो पहले कुछ भी खास नहीं था लेकिन आज उसकी कंपनी का टर्नओवर सालाना 25 करोड़ के आसपास जाता है,एक बेहद गरीब इंसान जोकि अंधा था,कैसे करोड़पति बन गया चलिए पढ़ते हैं उनकी पूरी जिंदगी के बारे में.

दोस्तों भावेश भाटिया जी एक मिडल क्लास फैमिली से थे,उनके पापा जी एक गेस्ट हाउस की देखरेख करते थे उनकी माता जी घर का कामकाज करती थी दोस्तों जब भावेश भाटिया जी का जन्म हुआ तो शुरु से ही उनकी आंखें कमजोर थी उनको सही से दिखाई नहीं देता था,धीरे धीरे उम्र के साथ उनकी यह कमजोरी और भी बड़ी कमजोरी होती गई और जब ये लगभग 20 साल के हुए तो उनकी आंखों ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया,ये पूरी तरह से अंधे हो गए,यह जिस कंपनी में काम करते थे उस कंपनी ने निकाल दिया क्योंकि यह अंधे हो चुके थे इसलिए इनको बेहद दुख था,इनके परिवार वालों को भी बहुत दुख था इसके बाद उनकी मां का देहांत हो गया,एक और प्रॉब्लम और उनके पास आ गई.

दोस्तों अब जिंदगी में कुछ पैसा कमाने के लिए कुछ तो करना था लेकिन उनको कोई भी काम नहीं दे रहा था,भावेश भाटिया जी ने एक n a b में प्रवेश लिया,वहां पर उन्होंने मोमबत्ती बनाना भी सीखा और साथ में एक थेरेपी भी सीखने लगे,यह प्रशिक्षण लेने के बाद होटल में काम करने लगे जहां पर वह एक थेरेपीस्ट का काम करते थे और साथ ही अपनी होटल से कुछ दूर ही वह कैंडल बनाकर बेचा करते थे दोस्तों वह एक थेले पर कैंडल बेचा करते थे,जब शाम होती तो कुछ रुपया बचता तो अगले दिन उस पैसे से मोम खरीद लेते थे इस तरह से उनकी जिंदगी चल रही थी,भावेश भाटिया जी अंधे थे उनको कुछ भी नहीं दिखता था उनकी सहायता के लिए कोई भी आगे नहीं आया लेकिन फिर भी वह जिंदगी में अब लगातार मेहनत करते रहे क्योंकि उनमें जिंदगी में आगे बढ़ने का एक जोश और जुनून था दोस्तों बहुत सारे बैंकों से उन्होंने लोन मांगा लेकिन किसी ने भी लोन नहीं दिया.

फिर एक बार उनकी जिंदगी में एक ऐसा बदलाव हुआ जिसके कारण उनकी जिंदगी बदल गई,एक दिन वह अपने ठेले पर मोमबत्ती बेच रहे थे उनके पास एक लड़की आई और मोमबत्ती खरीदने लगी,भावेश जी का स्वभाव उस लड़की को बहुत पसंद आया,धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो गई और दोस्ती जब लंबे समय तक चली तो दोनों में प्यार हो गया और दोनों ने शादी करने का फैसला लिया दोस्तों लड़की के परिवार वालों ने मना किया कि अधे से शादी मत कर लेकिन उस लड़की ने भावेश जी को देखते हुए, उनसे शादी करने का फैसला लिया,दोनों की शादी हुई और दोनों मोमबत्ती बेचने का काम करने लगे धीरे-धीरे मोमबत्ती बेचते हुए भावेश भाटिया जी को मोमबत्तियों के बारे में काफी अनुभव हो चुका था ,इसी बीच उन्होंने दो पहिया वाहन लिया और घूम-घूमकर कैंडल बेचने लगे,दोस्तों इस तरह से जिंदगी में कामयाबी पाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे लेकिन अभी मंजिल  अभी दूर थी दोस्तों उनकी लगातार की हुई मेहनत से बहुत से लोग उनकी मदद करने के लिए आगे आने लगे.

उनके एक दोस्त ने उनके लिए एक वेबसाइट बनाकर दी और साथ में ही एक दोस्त ने मोमबत्ती बनाने के लिए एक बहुत अच्छी जगह उपलब्ध करवाई,साथ में जिस संस्था यानी एनडीए में वह मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण ले रहे थे उसी संस्था के जरिए 15000 रूपये उन्हें मिले जिसके कारण उन्होंने अपने मोमबत्ती के कारोबार में और भी तेजी दिखाई और इन पैसों से उन्होंने कुछ मोम लिया,साथ में मोमबत्ती बनाने का सामान लिया,अब वह अपनी वेबसाइट के जरिए काम करते,धीरे धीरे बहुत से लोग उनकी वेबसाइट पर दिए गए कैंडल्स को पसंद करने लगे और उनके पास बहुत सारे लोग आने लगे,भावेश भाटिया जी धीरे धीरे बहुत पैसा कमाने लगे,दोस्तों अब सबसे बड़ी बात उनके लिए एक आई थी कि वह अकेले काम करते तो कब तक करते क्योंकि उनके पास बहुत सारे आर्डर थे इसलिए उन्होंने कुछ कर्मचारियों को कैंडल बनाने के लिए नियुक्त किया और सबसे बड़ी बात यह है कि सनराइज कैंडल में लगभग 225 कर्मचारी काम करते हैं जो कि ऐसे हैं जिनको भी नेत्रों से दिखता नहीं है,दोस्तों उनका एक ही मकसद था कि नेत्रहीन व्यक्ति जो कुछ कर नहीं सकते उनको भी हम कुछ करने के लिए आगे बढ़ने के लिए अच्छा मौका दें जिससे वह भी जिंदगी में आगे बढ़े.

दोस्तों इस तरह से धीरे-धीरे उन्होंने अपने इस सनराइज कैंडल के बिजनेस को बहुत आगे बढ़ाया,आज सनराइज केंडल को बहुत ही पसंद किया जाता है और करोड़ों रुपए काम करते हैं,आज इस कंपनी का टर्नओवर 125 करोड़ से भी ज्यादा है दोस्तों इस तरह से भावेश भाटिया जी ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की,यह सब अगर हो पाया तो सिर्फ और सिर्फ उनकी सच्ची मेहनत और लगन और एक आगे बढ़ने वाली सोच के दम पर हुआ,दोस्तों इस कहानी को लिखने के पीछे मेरा सिर्फ यही मकसद है कि आप भी जिंदगी में कुछ ऐसा कीजिए कि जिंदगी में आपका नाम हो जाए जिंदगी में आप एक सफल इंसान बन सकें दोस्तों भावेश भारतीय जी कहते हैं कि मेरी मां कहती थी कि बेटा तुझे भले ही नहीं दिखता लेकिन तुझे कुछ ऐसा करना है कि पूरी दुनिया तुझे देखे,दोस्तों वाकई में उनकी इस सोच ने भाटिया जी को एक बहुत बड़ी कामयाबी दिलवाई है और हम सभी को एक बहुत बड़ी सीख दी है.

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