नकली और असली हीरा “Asli heere ki pehchan kahani”

दोस्तों कैसे आप सभी,काफी समय पहले एक राजा सर्दियों के मौसम में अपने दरबार में बैठे हुए थे दरअसल सर्दियों के वजह से वह अपना दरवार मैदान में लगाए हुए थे,वह अपने मंत्रीगणों से बातचीत कर रहे थे तभी एक व्यक्ति वहां पर आया और महाराजा से कहने लगा कि महाराज मुझे आपको कुछ दिखाना है
Asli heere ki pehchan kahani

तब राजा की सहमति पाकर उस व्यक्ति ने राजा से आगे कहा कि महाराज मेरे पास दो चीजें हैं आप उन दोनों चीजों में से पहचानिए कि असली कौन सी है और नकली कौन सी है.

दराह्सल उसने राजा के सामने दो चीजे रखते हुए कहा-महाराज इन 2 हीरो में से एक हीरा नकली है वह कांच का है और दूसरा हीरा असली है आप में से कोई भी अगर इस असली और नकली का पता लगा लेगा तो मैं आपको मानूंगा कि आपके देश के लोग वाकई में बहुत बुद्धिमान है तब राजा के दरबार में उपस्थित सभी लोगों ने अपने अपने हिसाब से असली और नकली हीरे की पहचान करने की कोशिश की लेकिन कोई भी असली हीरे की पहचान नहीं कर सका.

अंत में राजा ने भी असली और नकली हीरे की पहचान करने की कोशिश की लेकिन इसमें वह भी विफल हो गया तब वहां पर उपस्थित एक अंधे व्यक्ति ने कहा-महाराज अगर आप मुझे अनुमति दें तो मैं नकली और असली हीरे में अंतर बता कर आपको बता सकता हु  तब सभी दरबारियों ने उस अंधे का मजाक उदय और कहा की तुम अंधे हो पर कैसे नकली और असली हीरे की पहचान कर सकते हैं तब उस व्यक्ति के ज्यादा कहने पर राजा ने उसे नकली और असली हीरे की पहचान करने की अनुमति थी तब उस अंधे व्यक्ति ने उन दोनों हीरो पर बारी बारी से हाथ लगा कर देखा और अंत में उस व्यक्ति ने राजा से कहा कि महाराज ये हीरा असली है और यह सुनकर महाराज और उस व्यक्ति ने पूछा आप कैसे बता सकते हो तब व्यक्ति बोला महाराज हीरा गरम धूप में भी रखने पर गर्म नहीं होता लेकिन कांच को धुप में रखने से गर्म हो जाता है इसलिए मैंने दोनों हाथ लगा कर देखा और मैंने असली हीरे की पहचान की.

दोस्तों वाकई में अगर जीवन में असली और नकली की पहचान करनी है तो हमारे अंदर ज्ञान होना चाहिए,हमारे अंदर नॉलेज होना चाहिए.हम कैसे हैं कैसा हमारा शरीर है उससे इसका कोई मतलब नहीं होता.

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