बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर निबंध “Beti bachao beti padhao essay in hindi”

Beti bachao beti padhao essay in hindi

हेलो फ्रेंड्स कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज की हमारी पोस्ट है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध दोस्तों जैसे की हम सभी जानते हैं कि आजकल लड़कियों की समस्या बहुत ही गंभीर हो चुकी है इसलिए हमने ये निबंध लिखा है दोस्तों हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने जनवरी 2015 में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नामक योजना का शुभारंभ किया था,दराह्सल यह योजना हमारे देश के लिए बहुत ही लाभदायक सावित हुयी और ये जरूरी भी थी क्योंकि हमारे देश में बेटियों की समस्याएं बेहद गंभीर थी.
Beti bachao beti padhao essay in hindi

आज हमारे देश में बेटियों को एक बोझ की तरह समझा जाता है,2000 से अभी तक हमारे देश में लड़कियों की संख्या दिनादीन कम होती जा रही है,इसी के संबंध में एक स्पेशल योजना बनाई गई थी दोस्तों आज हमारे देश में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो पुरानी सोच के हैं जो अपनी बेटियों को बोझ की तरह समझते हैं जो समझते हैं कि सिर्फ लड़की ही हमारे लिए जरुरी है,लड़कियां सिर्फ हमारे लिए बोझ हैं वह हमारे यहां जन्मने से कोई फायदा नहीं होगा इस वजह से बहुत सारे लोग बेचारी बेटियों को जन्म से पहले ही मार डालते हैं,दोस्तों हम सभी को इस सोच को हमेशा हमेशा के लिए निकाल देने की जरूरत है क्योंकि देश की बेटियां हमारे लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि आज हमारे देश की बेटियां नौजवान लडको से भी कदम से कदम मिला कर अपने माता पिता,सास-ससुर की मदद कर किसी पर बोझ नहीं रही है.

हम सभी को इस और विशेष रुप से सोचना चाहिए आज जहां देश के लड़के अपने मां-बाप के लिए सहयोग प्रदान करते हैं उससे कहीं ज्यादा लड़कियां भी करती हैं हमारे देश मैं लड़कियों के लिए 2015 में इस योजना ने बहुत ही अच्छा किया है,बेटियों के बगैर कुछ भी भविष्य नहीं है क्योंकि लड़की ही माता होती है लड़की ही जन्म देने वाली होती है इसके बगैर हमारे भारत देश का कुछ भी विकास संभव नहीं है दोस्तों हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस योजना को लागू करके बहुत ही अच्छा किया है क्योंकि हमारे देश की लड़कियों की संख्या दिनादीन कम होती जा रही,कुछ आंकने देखें तो कुछ दशकों लड़कियों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है 2001 में जहां लड़कियों की संख्या 970 थी वही दूसरी ओर लड़कों की संख्या 1000 थी और 2011 में और भी कम हो गई,2011 में 1000 लड़कों की संख्या में से लड़कियों की संख्या 919 थी.

दोस्तों हमारे देश में लड़कियों की संख्या दनादन कम होती जा रही है इसका एक कारण ही नहीं बल्कि कई कारण है,पहला कारण लड़कियों के मां बाप समझते हैं कि सिर्फ लड़का ही उनकी मदद कर सकेगा लड़कियां बुढ़ापे में मदद नहीं करेंगी,वह छोड़ कर चली जाती हैं वह पराया धन होती है यह मानसिकता बहुत से लोगों के दिमाग में होती है इस वजह से वह नहीं चाहते कि हमारे घर पर लड़की पैदा हो लेकिन इस मानसिकता को पूरी तरह से बदलने की जरूरत है क्योंकि आजकल लड़कियां लड़कों के मुकाबले अपने मां बाप की सेवा करती है,दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि कुछ लोग समझते हैं कि लड़के परिवार को आगे बढ़ाएंगे जब की लड़कियां सिर्फ पराया धन होती हैं दोस्तों हमें इस सोच को भी बदलने की जरूरत है और लड़कियों को पराया ना समझ के हमें अपना समझना चाहिए.

बहुत से केस ऐसे हुए हैं जिसमें लड़कियों ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है और वहीं दूसरी और लड़कों ने अपने खानदान का नाम बदनाम किया है इसलिए हमें सोच को बदलना होगा दोस्तों आजकल बहुत सारे मां बाप ऐसे होते हैं जो अपनी लड़कियों को अपनी बेटियों को बोझ समझते हैं वह उनको नहीं पढ़ाते जिससे उनको उचित शिक्षा नहीं मिल पाती,हमें इस सोच को बदलने की जरूरत है और लड़कियों को बोझ ना समझते हुए उनको पढ़ाने की जरूरत है क्योंकि बेतिया हमारे देश की शान है हमारे देश का भविष्य हैं दोस्तों हम सभी को लड़कियों की जरुरत समझते हुए उन्हें पढ़ाना चाहिए उचित ज्ञान देना चाहिए जिससे हमारे देश से एक बुरी सोच हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाए कि बेटी हमारे देश का बोझ है.

दोस्तों 21वी सदी में हमारे देश का निरंतर विकास हो रहा है नई-नई तकनिक आ रही है लेकिन इस विकास के साथ में लोगों की मानसिकता भी निरंतर गिरती जा रही है,लोग लड़कियों को बोझ समझने लगे हैं उन पर गंदी नजर डालने लगे हैं जिससे हमारे देश की बेटियां बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है हम सभी को बदलना होगा हम सभी को हमारी सोच को बदलना होगा और हम सभी को एक अच्छी मानसिकता के साथ हमारे देश की लड़कियों की इज्जत करना सीखना होगा और हमारे देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए कोशिश करना होगा.21वीं सदी में लोग बेटियों को वाकई में बोझ समझने लगे है,वह जन्म से पहले ही उसको मारने की कोशिश करने लगे है,हमको यह बुरी सोच को हमारे देश से हमारे समाज से हमेशा हमेशा के लिए निकालने की जरूरत है और हम सभी को समझना होगा कि लड़कियों के बगैर हमारे देश का भविष्य अंधकार की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है दोस्तों हमारा इस आर्टिकल को लिखने का सिर्फ यही मकसद है कि आप अपनी सोच को बदलें और लड़कियों को कोई भी बोझ न समझे,उनको पढाना है और उनकी इज्जत करें और कभी भी लड़कियों के जन्म पर दुखी न हों बल्कि इतना खुश होए कि आपकी खुशी पूरे देश को देखने को मिले.

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