सोइचिरो होंडा के संघर्ष की कहानी Soichiro honda biography in hindi

Soichiro honda biography in hindi 

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे महान इंसान के बारे में बताना चाहते हैं जिसने अपने जीवन में बहुत सी मुसीबतों का सामना किया है और अपनी मेहनत और लगन से एक बहुत ही बड़ा मुकाम हासिल किया है.आज वह भले ही इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी पहचान इस दुनिया में अभी भी है,आज हम आपको बताने वाले हैं Honda कंपनी के मालिक के बारे में.
Soichiro honda biography in hindi 
Soichiro Honda का जन्म 1906 में हुआ,उनके पिताजी एक लोहार का काम किया करते थे उनके पिता ने उनका स्कूल में एडमिशन करवाया.कुछ समय तक उन्होंने पढ़ाई की लेकिन पढ़ाई में इनका कोई विशेष ध्यान नहीं था इस वजह से उन्होंने और कुछ करने का डिसीजन लिया.एक बार जब उन्होंने अपने पास से एक कार गुजरते हुए देखी और उसके पेट्रोल की खुशबू उन्होंने सूंगी तो उन्होंने फैसला किया कि मैं भी एक दिन ऐसी कार बनाऊंगा.वह हमेशा से कुछ बड़ा करने के बारे में सोचा करते थे इसी वजह से 15 साल की उम्र में वह अपने शहर से बाहर काम की तलाश में चले गए.
कुछ सालों बाद वह वापस आए और ऑटो रिपेयरिंग का बिजनेस करने लगे उनको इस काम में बहुत ही अच्छा लगता था कुछ सालों बाद उन्होंने एक piston रिंग्स बनाई.जब उन्होंने पिस्टन रिंग्स बनाई तो सोचा कि मैं इसे Toyota कंपनी को बेचूंगा लेकिन कुछ प्रॉब्लम के कारण उनकी स्टोन रिंग Toyota कंपनी ने खरीदने से इंकार कर दिया.
इस नाकामयाबी के कारण उनको बुरा जरूर लगा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इसके लिए निरंतर प्रयास किया,उन्होंने पिस्टन रिंग और बेहतर बनाने के लिए बहुत से लोगों से मुलाकात की और एक बार फिर Toyota कंपनी मैं बेचने का सोचा और उनकी स्टोन रिंग्स Toyota कंपनी ने अच्छे दामों में खरीद ली,उन्होंने कुछ समय बाद एक कंपनी बनाई.इस कंपनी के साथ वह अच्छे से कार्य करने लगे लेकिन शायद उनकी जिंदगी में मुसीबतें ही थी. उनके बिजनेस में बहुत नुकसान हुआ और इस नुकसान के चलते उन्होंने Toyota कंपनी को अपनी कंपनी बेच दी, उन्होंने सब कुछ बेच दिया था उनकी जिंदगी में नाकामयाबी ही नाकामयाबी थी,उनको दुख जरूर हुआ लेकिन वह निराश बिल्कुल नहीं हुए उन्होंने फिर से कुछ अच्छा करने का डिसीजन लिया कुछ समय बाद द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान हार चुका था और इंजन सस्ते दामों में मिल रहे थे इन्होंने बहुत सारे छोटे इंजन खरीदे.
इसी बीच एक बार भूकंप भी आया जिसके चलते उनका बिज़नेस खत्म हो चुका था लेकिन वह जिंदगी में निराश नहीं हुए थे, वह जिंदगी में मिल रही नाकामयाबियों के बाद भी लगातार प्रयास किए जा रहे थे.जब भूकंप आया तो लोग साइकिल से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते थे उन्होंने साइकिल में इंजन लगाने का फैसला किया,अपनी निरंतर की हुई मेहनत से इन्होंने साइकिल में छोटा इंजन लगा दिया.लोगों को उनकी नई साइकिल बहुत पसंद आई उन्होंने जब इसको बेचा तो बहुत से लोगों ने इनको खरीदा.कुछ समय बाद उन्होंने पूरी मोटरसाइकिल बनाई और एक कंपनी खोली.इस तरह से उन्हें एक बड़ी कामयाबी मिली.उनकी Honda मोटरसाइकिल देश-विदेश में प्रसिद्ध होने लगी,लोग इसे पसंद करने लगे इसके बाद 1980 में इन्होंने एक कार बनाने वाली कंपनी बनाई और बहुत सी नई-नई कार्य बनाई जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया.उन्होंने बहुत पैसा कमाया,उनकी लगातार मेहनत करने से उन्हें जीवन में एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली लेकिन 1991 में इनकी मौत हो गई.
भले ही यह इंसान इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी बनाई हुई होंडा मोटरसाइकिल आज भी हमें सड़कों पर दौड़ते हुए मिलती है.हमें इस इंसान के जीवन से बहुत कुछ सीखना चाहिए कि जिंदगी में अगर कभी भी आपको कामयाबी मिल रही है तो यह मत सोचिए कि आप हारोगे बल्कि यह सोचिए कि भगवान आपकी परीक्षा ले रहा है कि आप जीवन में बहुत बड़ी सफलता प्राप्त करने के लायक हो या नहीं.
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