महात्मा की सीख short inspirational stories in hindi

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दुनिया में कुछ लोग बहुत ही कठोर होते है,और कुछ लोग मीठे स्वभाव के होते है,हमें अपनी कठोरता क्यों त्यागना चाहिएऔर मीठे स्वभाव को क्यों अपनाना चाहिए,इसके लिए में आपको एक प्राचीनकाल की घटना सुनाने वाला हु.

ऋषिकेश में एक महात्मा रहते थे,वोह बूड़े हो चुके थे,एक दिन उन्होंने अपने सारे शिष्यों को बुलाया और कहा की मेरा शरीर अब मेरा साथ छोड़ने वाला है,में कल इस दुनिया को छोड़कर जाने वाला हु तब सभी शिष्यों की आँखों में आँशु थे,वोह सभी रोने लगे तब कुछ समय बाद जव ये विलाप शांत हो गया तब एक शिष्य ने गुरूजी से कहा की आप आखरी बार हम सबको कोई सीख देना चाहेंगे तब गुरूजी बोले हां बिलकुल.

तब गुरूजी ने अपने शिष्यों से कहा की मेरे मुख के अन्दर देखिये आपको क्या क्या नजर आ रहा है.

तब सभी शिष्य बोले की गुरूजी हमें आपके मुह में जीव नजर आ रही है तब गुरु जी बोले की मेरे मुह के अन्दर दन्त दिखाई डे रहे है तब सभी शिष्य बोले की हमें आपके मुह के अन्दर दन्त दिखाई नहीं डे रहे है,गुरूजी बोले की जब इन्सान का जन्म होता है तब जीव पहले आती है या दन्त.

शिष्य बोले-गुरूजी पहले जीव मुख के अन्दर आती है फिर दांत आते है.

तब गुरूजी अपनी बात का मतलब समझाते हुए बोले की जिस प्रकार दन्त इन्सान के मुख में देर से उगते है और जल्दी गिर जाते है यानी जीव की अपेक्छा दांतों की उम्र कम होती है,साथ में दांत कठोर होते है फिर भी वोह जल्दी गिर जाते है लेकिन जीव कठोर नहीं होती,जीव लचीली होती है फिर भी वोह लम्बे time तक हमारे मुख में रहती है उसी प्रकार जो व्यक्ति कठोर होता है,वोह दुनिया में सही से नहीं जी पाता,वोह दांतों की तरह एक दिन गिर जाता है तोह शिष्यों अगर आपको जीवन के किसी भी छेत्र में लम्बे time तक रहना है तोह अपनी कठोरता त्याग दीजिये.और जीव की तरह मुलायम बनिए.

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