मेरी अविस्मरणीय यात्रा पर निबंध “Yatra ka varnan in hindi essay”

Yatra ka varnan in hindi essay

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज का हमारा आर्टिकल Yatra ka varnan in hindi essay आपको मेरी रोमांचक यात्रा के बारे में विस्तृत जानकारी देगा.दोस्तों किसी यात्रा का वर्णन करने में बड़ा ही अच्छा महसूस होता है तोह सोचिये की यात्रा करने में कैसा महसूस होगा.यात्रा करना हमारे जीवन के लिए जरूरी भी है और लोग यात्रा करने में अच्छा महसूस भी करते हैं.

Yatra ka varnan in hindi essay
Yatra ka varnan in hindi essay

आजकल के जमाने में लोग अपने रोजाना की दैनिक दिनचर्या से बोर हो चुके हैं वह कहीं पर, अच्छी जगह यात्रा करना चाहते हैं, कुछ पल सुख से रहना चाहते हैं वह अपने समाज से कुछ पल के लिए बहार आना चाहते हैं,लोग अपनी आंखों का लाभ बाहर उठाना चाहते हैं इसलिए वह यात्रा करते हैं.यात्रा करने से  हमें बहुत सारे लाभ होते हैं हमारा स्वास्थ्य ठीक होता है,हम चलते हैं तो हमारे शरीर का रक्त संचार सही होता है और हम एक अच्छे वातावरण को देखते हुए खुश होते हैं और हमारी मानसिक स्थिति अच्छी होती है.

Yatra ka varnan in hindi essay

हर एक इंसान को अपने जीवन में किसी अच्छे स्थान पर यात्रा करने जाना चाहिए और यात्रा पूरे परिवार के साथ करना चाहिए.आज से कुछ समय पहले मैंने भी अपने परिवार के साथ यात्रा की मथुरा वृंदावन की यात्रा.दोस्तों एक दिन मेरे पापा जी ने मेरी मम्मी से कहा मथुरा वृंदावन की यात्रा को चलने के लिए और जब मेरी मम्मी ने मुझसे कहा तो मुझे बहुत ही खुशी हुई क्योंकि उस समय मेरी छुट्टियां चल रही थी और मैं घर में रहकर बोर हो रहा था वैसे तो अक्सर हम छुट्टियों के दिनों में नाना नानी के पास चले जाते थे लेकिन उस समय मैं घर पर ही था. मैं मेरे मम्मी पापा और मेरी बहन हम चारों ने मथुरा वृंदावन की यात्रा करने का डिसीजन लिया और 1 तारीख निश्चित की गई उस दिन हम सुबह जल्दी उठे हमने नहाया और हम हमारे पास के रेलवे स्टेशन से यात्रा करने के लिए निकले.

हमने देखा कि उस समय ट्रेनों में काफी भीड़ भाड़ रहती है,सभी ट्रेने उस समय अक्सर भरी हुई होती हैं,हम ट्रेन में सवार हुए और काफी लंबे सफ़र के बाद हम ग्वालियर पहुंचे.ग्वालियर से हमने मथुरा वृंदावन जाने के लिए एक नई ट्रेन पकड़ी और वहां से निकल पड़े.रास्ते में हम सभी ने मिलकर खाना खाया,बहुत मनोरंजन किया.हमारा परिवार पहली बार ही कहीं बाहर घूमने के लिए जा रहा था, मैं अपने मम्मी पापा,अपनी बहन को देखकर काफी खुश था,सभी खुश थे क्योंकि हमने मथुरा वृंदावन के आकर्षक दृश्य के बारे में पहले ही बहुत कुछ सुना था हम ट्रेन के द्वारा मथुरा वृंदावन की भूमि पर उतरे और वहां से मंदिरों के दर्शन के लिए चल पड़े.

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सबसे पहले हमने श्री कृष्ण जन्म भूमि वाले मंदिर के दर्शन किए. श्री कृष्ण जन्म भूमि का मंदिर शहर के बीच में स्थित है यहां पर दुनिया भर से श्रद्धालु आए हुए थे,बहुत भीड़ भाड़ थी इसके बाद हम द्वारकाधीश मंदिर गए वहां पर हमने देखा कि यमुना नदी का घाट है जहां पर बहुत सारे लोग नहाते हैं और बहुत सी नौका लगी हुई है जहां पर कोई भी व्यक्ति यमुना नदी में नौका में बैठकर घूम सकता है. मैंने अपने पापा से कहा हम चारों नौका में सवार हो गए.हमने यमुना नदी के चारों ओर चक्कर लगाया,हमें बहुत ही खुशी महसूस हो रही थी इसके बाद बांके बिहारी मंदिर के दर्शन करने के बाद हम आगे निधीवन की ओर चल पड़े.

निधिवन एक बहुत ही रमणीय स्थान है कहा जाता है कि यहां पर बहुत सारे साधुओं ने समाधि ली हुई है और श्री कृष्ण और राधा जी ने यहां पर बहुत सारी तरह-तरह की क्रीड़ाएं की है. कहते हैं यहां पर रात के समय कोई भी नहीं रुक सकता क्योंकि रात के समय श्री कृष्णा और राधा जी स्वयं यहां पर रासलीला करते हैं इसके बाद हम वहां से प्रेम मंदिर की ओर गए.कहते हैं प्रेम मंदिर का रंग रात में हमेशा बदलता रहता है यह बहुत ही देखने लायक दृश्य होता है वाकई में मथुरा वृंदावन बहुत बढ़िया स्थान है जहां पर हर एक नागरिक को दर्शन करने के लिए जाना चाहिए इसके अलावा भी हम कई मंदिरों पर गए वहां पर जाने पर हमें बहुत खुशी महसूस हुई और हमको लगा कि हमने इस दुनिया में ईश्वर के दर्शन कर लिए.

इसके बाद हम गोवर्धन पर्वत देखने के लिए गए. कहते हैं इस गोवर्धन पर्वत को श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर उठाया था गोवर्धन पर्वत लगभग 21 किलोमीटर की दूरी में फैला हुआ है.21 किलोमीटर की दूरी तय करके लोग इसकी परिक्रमा करते हैं,इसको लोग गिर्राज जी की कहते हैं वाकई में ये देखने लायक स्थान हैं,मैंने अपने मम्मी पापा बहन सभी के साथ इन जगहों के दर्शन किए और हमें बहुत ही अच्छा लगा इसके बाद हम वहां से वापस आ गए हमने जब वहां के दृश्य देखे तो हमारा आने का मन नहीं कर रहा था क्योंकि वहां का वातावरण इतना अच्छा था,पेड़ पौधे और वहां का वातावरण हमे अपनी ओर खींच रहे थे वाकई में वह दृश्य देखने लायक था.दोस्तों इस तरह से मैंने मथुरा वृंदावन की यात्रा की।

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