गौतम बुद्ध का जीवन परिचय mahatma gautam budh ka jeevan parichay

Mahatma gautam budh ka jeevan parichay

mahatma gautam budh ka jeevan parichay-हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज का हमारा आर्टिकल mahatma gautam budh ka jeevan parichay आपको भगवान गौतम बुद्ध के जीवन के बारे में विस्तृत जानकारी देगा.हमारे भारत देश में प्राचीन काल से ही बहुत सारे ऐसे महापुरुष जन्मे हैं जिन्होंने हमारे देश का भला किया है जिन्होंने हमारे देश में अच्छाई,संस्कृति,धर्म,प्रेम सदाचार और अहिंसा जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी और हमें इन रास्तों पर चलने की सलाह दी है.महात्मा गौतम बुद्ध जी भी कुछ ऐसे ही थे उन्होंने हमें इन्हीं रास्तों पर चलने की सलाह दी थी आज हम जानेंगे महात्मा गौतम बुद्ध जी के जीवन के बारे में.
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दोस्तों महात्मा गौतम बुद्ध जी के पिताजी का नाम शुद्धोधन था और माता का नाम महामाया था जब ये 7 दिन के थे तभी इनकी माता का स्वर्गवास हो गया था इसी वजह से उनका पालन पोषण उनके पिता जी और उनकी महल की दास दसियों ने किया था.इनके पिताजी एक राजा थे इनके पिता जी को उनके एक ज्योतिष ने कहा था कि आपका पुत्र गौतम आगे चल कर या तो कोई बहुत बड़ा महात्मा बनेगा या कोई पराक्रमी राजा बनेगा.यह सुनकर गौतम बुद्ध के पिताजी शुरू से ही गौतम की देखरेख में विशेष ध्यान देते थे उनको डर लगता था कि ऐसा ना हो कि गौतम दुनिया के बाहर की स्थिति जानकारी कोई महात्मा बन जाए इसलिए उन्होंने शुरू से ही अपने पुत्र की देखरेख अच्छी तरह से करने की कोशिश की थी.उन्हें हमेशा सुखी वातावरण में रखने की कोशिश की थी कभी भी उन्हें दुनिया के अवगुण और दुखों के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी.
एक बार गौतम बुद्ध जब अपने रथ पर सवार होकर कहीं जा रहे थे तभी उन्होंने एक भिखारी को देखा जो इधर-उधर भीम मांग रहा था उसकी स्थिति बहुत ही दयनीय थी ऐसा लग रहा था कि उसने काफी दिनों से कुछ भी खाया पिया नहीं है गौतम बुद्ध जी को इस तरह की स्थिति को देखकर बहुत ही दुख हुआ.उन्होंने सोचा कि दुनिया में ऐसा भी होता है की लोग इतने भी दुखी होते हैं मुझे इस तरह की जानकारी पता नहीं थी मैं तो सिर्फ यही समझता था कि दुनिया का हर एक इंसान मेरी तरह ही सुखी है.तभी से गौतम बुद्ध जी के मन में एक विचार आया था कि क्यों ना मैं भी कुछ ऐसा ही करु जिससे मुझे इन दीन दुखियों की सहायता करने का मौका मिल सके.गौतम बुद्ध जी शुरू से ही बहुत ही भावुक किस्म के इंसान थे.वह किसी भी व्यक्ति का दुख नहीं देख सकते थे इस संदर्भ में एक प्रसंग भी कहा गया है जो कि किताबों में भी पड़ा जा सकता है
इसके अनुसार गौतम बुद्ध जी का एक रिश्तेदार था जिसने एक पक्षी मैं अपने तीर कमान के द्वारा निशाना साधा तो वह पक्षी जमीन पर गिर पड़ा.गौतम बुद्ध जी ने उसको उठाया लेकिन दोनों यानी गौतम और उनके रिश्तेदार में झगड़ा हुआ कि ये पक्षी मेरा है तभी वह राजा के समक्ष गए और जब वह पिता के समक्ष उपस्थित हुए तो गौतम ने कहा कि पिता श्री हमेशा मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है इसलिए इस पक्षी पर मेरा अधिकार होना चाहिए.इस तरह से उनके पिता यानी उस समय के राजा ने उस पक्षी को गौतम को देने का फैसला किया.
इस व्रतांत से हमें जानने को मिलता है कि गौतम बुद्ध जी शुरू से ही एक सरल स्वभाव के धनी इंसान थे.गौतमबुद्ध जी जब 16 वर्ष के थे तभी उनकी शादी यशोधरा से हो गई इसके बाद यशोधरा से इन्हें एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम राहुल था.जब राहुल 7 दिन का था तभी गौतम बुद्ध जी उसे छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए चले गए थे.
उन्होंने सन्यास ले लिया था दरअसल हुआ कुछ यूं था कि शुरू से ही गौतम बुद्ध जी सत्य की खोज करने के लिए जागरूक थे वह चाहते थे कि मैं दीन दुखियों की मदद करूं उन्हें शिक्षित करु लेकिन यहां पर राजमहल में रहते हुए मैं सब कुछ नहीं कर सकता इसलिए गौतम बुद्ध जी ने रातोरात अपने महल से निकलने का निश्चय किया और जंगल में जा पहुंचे.जंगल में वह वहां के साधु महात्माओं के साथ थे.बहुत दिन साधु महात्माओं के साथ रहने के बावजूद भी उनके हाथ कुछ नहीं लगा वह किसी तरह से लोगों को प्रेम की शिक्षा,अहिंसा की शिक्षा देना चाहते थे वह लोगो को इस बारे में ज्ञान लेना चाहते थे तभी उन्होंने लगभग 49 दिनों तक तपस्या करने का फैसला किया फिर इसके बाद एक दिन गौतम बुद्ध जी को सत्य का ज्ञान हो गया और उनके ज्ञान को देखकर बहुत सारे लोग उनके चेले बन गए.
एक बार वह उस समय के कस्सप और नादी कस्सप नामक दो महात्माओं से मिले इन दोनों महात्माओं के हजारों चेले थे लेकिन जब महात्मा बुद्ध ने इन दोनों महात्माओं के समक्ष अपने विचार रखें और इन्हें सत्य का ज्ञान बताया तो महान ऋषि मुनि भी महात्मा गौतम बुद्ध के शिष्य बन गए जो कि इनसे उम्र में बड़े भी थे लेकिन कहते हैं ज्ञान कभी कम या ज्यादा उम्र वालों को देखकर नहीं आता ज्ञान किसी से भी लिया जा सकता है इस तरह से इनके हजारों श्रद्धालु,हजारों चेले बन गए और उनके बताए गए धर्म के रास्तों पर,अच्छाई के रास्ते पर चलने लगे और लोगों को इसके बारे में जानकारी देने लगे.
उस समय वह मगध की राजधानी के राजा के पास पहुंचे वहां के राजा ने जब सुना कि बहुत से ऋषि मुनि जी गौतम बुद्ध के चेले बन चुके हैं तब उन्होंने उनके दर्शन किए और वह खुद भी महात्मा गौतम बुद्ध के चेले बन गए इस तरह से महात्मा गौतम बुद्ध जी के विचार धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फेलने लगे.उनकी सत्य अहिंसा और अच्छाई वाली विचारधारा ने धीरे-धीरे एक विकराल रुप ले लिया और लोग उनको अपना गुरु मानने लगे.गौतम बुद्ध जी के बारे में बहुत सारे वृतांत हैं जिनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है कहा जाता है कि इन्होंने अपने ज्ञान के दम पर एक जिस्म बेचने वाली वेश्या को भी अपनी शिष्या बना लिया था और वह भी गौतम बुद्ध जी के साथ में धर्म सत्य और अहिंसा का प्रचार पूरे देश में करने लगी वह भी एक बहुत बड़ी धर्म और समाज सुधारक सावित हुयी.गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार भी कहा जाता है.ये हमेशा से ही लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण रहे हैं.
कहते हैं जब एक इंसान अच्छे काम करता है धर्म सत्य और अच्छाई के मार्ग पर चलता है तो बहुत से लोग उसके दुश्मन बन जाते हैं महात्मा गौतम बुद्ध जी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था बहुत सारे लोगों ने उनको अपने जाल में फसाने की कोशिश की लेकिन अच्छाई की हमेशा जीत होती है.वह लोग गौतम बुद्ध जी की छवि में थोड़ा सा भी परिवर्तन नहीं कर पाए. गौतम बुद्ध जी ने धीरे-धीरे अपने बौद्ध धर्म को पूरे देश में एक बड़ा रूप दिया लेकिन समय के साथ में वह लुप्त होता जा रहा है.
लेकिन वाकई में गौतम बुद्धा जी के द्वारा बताये गए सत्य,अहिंसा के मार्ग पर हमें चलना चाहिए और जीवन कुछ अच्छा करना चाहिए.
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