मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र Meri Priya Pustak Panchatantra

Meri Priya Pustak Panchatantra

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज का हमारा आर्टिकल Meri Priya Pustak Panchatantra आप सभी के लिए बहुत ही interesting साबित होगा दोस्तों हम आपके समक्ष बहुत से आर्टिकल प्रस्तुत कर चुके हैं,बहुत से आर्टिकल आपने पसंद किये.दोस्तों आज के हमारे इस आर्टिकल को भी आप जरूर पसंद करोगे.

Meri Priya Pustak Panchatantra
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दोस्तों जैसे की हम सभी जानते हैं कि पुस्तके हर इंसान के जीवन में बड़ा ही महत्व रखती हैं,आज हम जो भी हैं जैसे भी हैं उनमें कहीं ना कहीं सबसे ज्यादा योगदान पुस्तकों का होता है.पुस्तकें हमको ज्ञान देती हैं,हमको सही और गलत की पहचान कराती हैं,हमको एक अच्छा इंसान बनाती हैं पुस्तकें हर इंसान के लिए बहुत जरूरी हैं.पुस्तकों के जरिए हम प्राचीन काल में अच्छाई और बुराई के बारे में जानकारी ले सकते हैं और अपने जीवन में अच्छाई को अपना सकते हैं और नए नए रास्ते पर चलकर अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं.पुस्तके पढना हर इंसान का शौक होना चाहिए क्योंकि पुस्तके हमारी जिंदगी भी बदल सकती हैं.हमारे देश में बहुत सी ऐसी पुस्तके हैं जो चारों और फैली हुई हैं जिनको बहुत से लोग पसंद करते हैं जो हमेशा पढ़ी जाती हैं जैसे की रामायण, गीता,महाभारत और पंचतंत्र बहुत ही प्रसिद्ध पुस्तकें हैं मुझे भी ये पुस्तके बहुत पसंद हैं इन पुस्तकों से हमको बहुत सारी सीख मिलती है हमको जीवन में खुशहाल रहने में और जीवन में आगे बढ़ने में पुस्तकें हमारी बहुत मदद करती हैं इनमें से ही पंचतंत्र नाम की पुस्तक हमारे देश में बहुत ही प्रसिद्ध है,मुझे ही नहीं बल्कि हर नौजवान और बच्चे को पंचतंत्र की कहानियां बहुत ही रोचक लगती हैं और बच्चे भी इस पुस्तक के माध्यम से बहुत ही जल्दी शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं चलिए जानते हैं पंचतंत्र की मेरी प्रिय पुस्तक के बारे में.

दोस्तों पंचतंत्र की ये पुस्तक राजा अमर शक्ति के राज्य में लिखी गयी.राजा बहुत ही अच्छी तरह से न्याय करते थे वह बहुत ही होशियार थे उनके 3 पुत्र थे बहु शक्ति,उग्र शक्ति और अनंत शक्ति.राजा अपने तीनों पुत्रों से बेहद परेशान थे क्योकि उनके तीनो पुत्र मंदबुद्धि थे.राजा किसी भी तरह अपने मूर्ख पुत्रों को सुधारना चाहते थे.एक दिन उन्होंने अपनी सभा में सभी मंत्रीगणों से कहा कि मैं अपने तीनों पुत्रों से बहुत ही परेशान हूं आप कोई ऐसा मार्गदर्शन दें कि जिससे मेरे तीनो पुत्र बुद्धिमान बन जाए और जीवन में आगे बढ़ें तभी वहां पर बैठे हुए एक मंत्री ने राजा से कहा कि महाराज अपने राज्य में एक बहुत ही बुद्धिमान ब्राह्मण विष्णु शर्मा जी रहते हैं वह अपनी शिक्षा से बहुत से लोगों को बुद्धिमान बना चुके हैं क्यों ना हम भी उनको यहां पर बुलाकर राजकुमारों को उचित शिक्षा देने के लिए कहे.

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ऐसा सुनकर राजा ने तुरंत ही विष्णु शर्मा नाम के ब्राह्मण को अपने राज्य में बुलवाया विष्णु शर्मा जी एक दिन सभा में उपस्थित हुए.जब राजा ने अपनी परेशानी विष्णु शर्मा नामक ब्राह्मण से कही तो वह बोले कि मैं आपके पुत्रों को बुद्धिमान बना दूंगा कि वह जीवन में आगे भी बढ़ सकें और जीवन में किसी भी फैसले के सही और गलत की पहचान कर सके और उस विष्णु शर्मा ब्राह्मण ने आगे कहा कि महाराज अगर मैं 6 महीने में ये नहीं कर पाया तो आप मुझे कोई सजा दे ऐसा सुनकर उस राजा ने अपने तीनों पुत्रों को 6 महीने के लिए विष्णु शर्मा ब्राह्मण के पास छोड़ दिया और वाकई में 6 महीने में विष्णु शर्मा के द्वारा बताई गई,दी गई शिक्षा से तीनों राजकुमार बहुत ही बुद्धिमान हो गए क्योंकि विष्णु शर्मा जी ने जो राजकुमारों को बताया वह बहुत ही सरल था.उन्होंने पशु पक्षियों के बारे में कुछ कहानियां सुनाई, कुछ ऐसे वृतांत सुनाएं जिससे राजकुमारों को सही और गलत की पहचान हुई और वह एक अच्छे इंसान बने साथ में उनका अहंकार भी नष्ट हो गया. यह देखकर राजा बहुत ही खुश थे उसके बाद विष्णु शर्मा ब्राह्मण ने एक ग्रंथ लिखने का विचार किया उन्होंने पंचतंत्र नाम का ग्रंथ लिखा जिसमें पशु पक्षियों और हमारे समाज से कुछ कहानियां ली गई और उंहें ग्रंथ में लिखा जिसके जरिए हमें इस ग्रंथ में बहुत सी ऐसी रोचक कहानियां पड़ने को मिली जो मनोरंजन के साथ हमें ऐसी शिक्षा दे जाती हैं जो हम वैसे ही नहीं समझ सकते.

पंचतंत्र की कहानियां बच्चों को भी शिक्षा देती हैं वैसे बच्चे किसी भी बात को सही तरह से नहीं समझ पाते क्योंकि वह दुनिया से अनजान होते हैं लेकिन पंचतंत्र की पशु-पक्षियों और जानवरों की कुछ कहानियां जब बच्चों को सुनाई जाती हैं या वह पंचतंत्र के ग्रंथ में पढ़ते हैं तो वास्तव में वह बहुत सी शिक्षा ग्रहण करते हैं जिससे वह जिंदगी में आगे बढ़ते हैं,वह ईमानदार बनते हैं साथ में उन में सही और गलत की पहचान करने की योग्यता आती है.वह पंचतंत्र की कहानी पढ़कर इतने उत्साहित हो जाते हैं कि वह अपने दोस्तों,रिश्तेदारों या अपने जान पहचान वालों को भी वह कहानियां सुना देते हैं जिससे उनको भी वह शिक्षा प्राप्त होती है इस तरह से हम कह सकते हैं कि पंचतंत्र ग्रंथ एक बहुत ही सरल और बहुत ही अच्छा ग्रंथ है जिसे पढ़कर ना की नौजवान बल्कि बच्चे भी आसानी से कुछ अच्छा सीख सकते हैं और मुझे भी इस ग्रंथ की कहानियां बहुत ही पसंद आती हैं.हमें इससे शिक्षा प्राप्त होती हैं साथ में बहुत मनोरंजन भी करती हैं.

मैं जब बच्चा था तभी से पंचतंत्र की नई नई कहानियां पढ़ता हूं क्योंकि यह कहानियां बहुत ही रोचक होती हैं बच्चों को भी जब ये कहानियां सुनाई जाती हैं तो वह मन लगाकर इन कहानियों को सुनते हैं क्योंकि बच्चों को पशु पक्षियों के बारे में जानने के की शुरू से ही इच्छा होती है इस तरह से हम कह सकते हैं कि पंचतंत्र एक ऐसा ग्रंथ है जो हमारे देश में बहुत ही तेजी से फैलता जा रहा है और वास्तव में इसकी लोगों को जरूरत भी है.

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