फिरोज गांधी का इतिहास Feroze gandhi biography in hindi

Feroze gandhi biography in hindi

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं Feroze gandhi biography in hindi .फिरोज गांधी भारत देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के दामाद थे और उनकी बेटी इंदिरा गांधी के पति थे वह एक राजनेता के साथ में एक पत्रकार भी थे उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी भाग लिया था चलिए पढ़ते हैं इनके जीवन की पूरी कहानी.

Feroze gandhi biography in hindi
Feroze gandhi biography in hindi

image source- https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Feroze_Gandhi_and_Indira_Gandhi.jpg

फिरोज गांधी का नाम फिरोज जहांगीर घंडी था इनके पिता का नाम फरिदून जहांगीर घंडी था जो कि एक इंजीनियर थे उनकी माता का नाम रतीमई था उनके दो भाई और दो बहने भी थी.इन्होने अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की उसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन भी किया लेकिन इसी के बीच लगभग 1920 में उनके पिता की मृत्यु हो गई जिस वजह से उन्होंने अपने जीवन में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा.इनका परिवार इनकी आंटी जो कि एक सर्जन थी के पास रहने लगा.

इनकी पहली मुलाकात इंदिरा गांधी से सन 1930 में हुई थी.1930 में जब ये महिला प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास कर रहे थे तभी वह इंदिरा गांधी और उनकी मां कमला नेहरू से मिले थे दरअसल हुआ कुछ यूं था कि गर्मी की वजह से कमला नेहरु की तबीयत खराब हो गई थी और फिरोज गांधी ने उनकी मदद की थी इसके कुछ सालों बाद जब कमला नेहरू अपना इलाज करवाने के लिए यूरोप गई हुई थी तब भी फिरोज उनकी देखभाल के लिए यूरोप चले गए थे इस तरह से इंदिरा गांधी के दिल में उनके प्रति जगह बनी इसके कुछ समय बाद ही 1936 में कमला नेहरू की टीवी रोग की वजह से मौत हो गई थी उस समय फिरोज ने काफी हद तक इंदिरा गांधी का साथ दिया और उनको संभाला इस तरह से इंदिरा गांधी और फिरोज के बीच रिश्ते बनते चले गए और आगे चलकर 1942 में दोनों ने शादी कर ली.
सुना है कि उनकी शादी लंदन में हुई थी लेकिन जब उसकी खबर महात्मा गांधी जी को लगी तो उन्होंने उन दोनों को अपने भारत देश में बुला लिया और पूरी वैदिक प्रक्रिया के साथ उन दोनों का विवाह किया गया और फिरोज का नाम बदलकर महात्मा गांधी ने उन्हें अपना नाम दिया और तभी से फिरोज फिरोज गांधी के नाम से जानने लगे इसके पीछे एक बात मानी जाती है कि शायद जवाहरलाल नेहरु को उस समय अपनी राजनीति मैं खतरा दिखाई दे रहा था तभी महात्मा गांधी जी ने जवाहरलाल नेहरु जी की सहमति सहमति से फिरोज को अपना सरनेम बदलने को कहा था.

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इंदिरा गांधी जी के पिता जवाहरलाल नेहरू इस शादी के खिलाफ थे क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि इंदिरा गांधी फिरोज से शादी करे लेकिन समय के साथ उन्होंने इस रिश्ते को भी मंजूरी दे दी थी लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला कुछ समय बाद वह दोनों अलग अलग हो गए लेकिन उन दोनों में तलाक नहीं हुआ था इसके बाद भारत छोड़ो अभियान के दौरान फिरोज गांधी को 1 साल की जेल हुई.जेल से आने के बाद उन्होंने कुछ साल साथ में अच्छी तरह गुजारे इसके बाद फिरोज और इंदिरा इंदिरा ने मिलकर दो लड़कों को जन्म दिया और दोनों अच्छी तरह जिंदगी गुजारने लगे.
सन 1952 में रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र से फिरोज गांधी ने जनरल चुनाव जीता.धीरे-धीरे वो राजनीति में अपने कदम जमाने लगे वह एक पत्रकार तो थे ही साथ में राजनीति का भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके थे लेकिन वह लगातार अपने ससुर जी की सरकार की बुराई करते थे उन्होंने अपने जीवन में बहुत से ऐसे काम भी किए थे जिससे जवाहरलाल नेहरू सरकार को बहुत बड़ा झटका लगा था जिसके चलते वह चारों ओर प्रचलित हो गए थे.

इस तरह से फिरोज गांधी ने अपने जीवन में भ्रष्टाचार विरोधी काम भी किए और जीवन में एक नाम भी कमाया वह जीवन में हमेशा आगे बढ़ना चाहते थे उन्होंने अपने दम पर बहुत कुछ किया था लेकिन समय के साथ बीमारी ने उन्हें घेर लिया.एक बार उन्हें हृदय विकार हुआ जिस वजह से उन्हें बहुत सी परेशानी का सामना करना पड़ा.पहले ह्रदय विकार के समय इंदिरा गांधी भूटान में थी जब उन्हें यह पता लगा तो वह अपने पति के पास आई और कुछ समय बाद ही दो साल बाद सन 1960 में उन्हें दूसरा हृदय विकार हुआ और दिल्ली के हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई.इस तरह से एक पत्रकार एक राजनेता हम सभी को छोड़कर चले गए लेकिन वह अपने देश के लिए बहुत से कार्य कर गए जिससे उन्हें लोग हमेशा याद करते हैं.
फिरोज गांधी जिनका नाम फिरोज घंडी था इनके विषय में ये भी कहा जाता है की एक बार जब फिरोज महात्मा गांधी से मिले तो वह उनसे इतना प्रभावित हुए की उन्होंने अपना सरनेम बदल लिया वह फिरोज गांधी हो गए और पूरी दुनिया उन्हें फिरोज गांधी के नाम से जानने लगी.

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