गियासुद्दीन बलबन की जीवनी Ghiyasuddin balban history in hindi

Ghiyasuddin balban history in hindi

हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज का हमारा आर्टिकल Ghiyasuddin balban history in hindi आप सभी को एक प्राचीन शासक ग्यासुद्दीन बलबन के बारे में जानकारी देगा ग्यासुद्दीन बलबन एक ऐसे शासन थे जो भारत आकर दिल्ली सल्तनत में शासक बने.उन्होंने बगदाद से भारत तक का सफर बहुत ही मुश्किलों से यापन किया लेकिन वो अपनी लगन,मेहनत से लगातार उन्नति करते गए.इनका जीवन बहुत सी मुसीबतों से गुजरा था.इनके शासनकाल में बहुत से लोगों ने उनका विद्रोह किया और बाल्यकाल में भी इन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा चलिए जानते हैं इनके जीवन के बारे में पूरी जानकारी.

Ghiyasuddin balban history in hindi
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ग्यासुद्दीन बलबन का वास्तविक नाम बहाउद्दीन था उनके पिता जी एक सरदार थे.ये बचपन में अपने परिवार से अलग हो गए थे दरअसल हुआ कुछ यूं था कि मंगोलों ने इन्हें पकड़कर बगदाद शहर के बाजार में दास के रूप में बेच दिया था.बचपन में दास के रूप में इन्हें अपना जीवन यापन करना पड़ा लेकिन समय के साथ ये भारत आ गए. भारत में जब इन्हें सुल्तान इल्तुतमिश मिले तो इन्हें बलवन पर दया आ गई और उन्होंने इनको मोल ले लिया.गयासुद्दीन बलबन सुल्तान की हमेशा सेवा करते थे वह अपनी तरफ से किसी भी तरह की कमी नहीं करते जिस वजह से सुल्तान उन पर बहुत ही खुश हुए और बलवन हमेशा उन्नति करते चले गए इस तरह से समय निकलता गया और कुछ समय बाद ही सुल्तान ने उन्हें एक दल में सम्मिलित कर लिया कुछ समय बाद जब रजिया का राजकाल था तब बलबन की नियुक्ति अमीरे शिकार के पद पर हुई जिसके चलते उन्हें कुछ क्षेत्र प्रदान किए गए और इसके बाद ग्यासुद्दीन बलबन ने मंगोलों से युद्ध किया इस युद्ध में उन्होंने जीत हासिल करके अपने साहस को प्रकट किया जिससे सभी को उन पर लगातार विश्वास होने लगा था

समय के साथ जब नासिरुद्दीन महमूद सिंहासन पर विराजित हुए तो उन्होंने बलवन को मुख्यमंत्री के पद पर चयनित किया.मुख्यमंत्री पद लेने के बाद गयासुद्दीन बलबन लगातार उन्नति करते गए हैं अपने राज्य की सुरक्षा के लिए कभी भी मुसीबतों से जूझने से पीछे नहीं हठे वो हमेशा साहस और दृढ़ संकल्प के कारण लगातार उन्नति करते गए और उस समय के सुल्तान को उस पर बहुत भरोसा हो गया जिस वजह से सुल्तान ने अपनी बेटी की शादी ग्यासुद्दीन बलबन से कर दी और इसी के साथ उन्हें नायब सुल्तान की उपाधि दी.

ग्यासुद्दीन बलबन ने अपने समय में बहुत से अभियान चलाए जिस वजह से जो उनके प्रतिद्वंदी थे वह उनके खिलाफ तरह-तरह के षड्यंत्र करते थे वह किसी तरह बलबन को अपने पद से हटाना चाहते थे वह इसके लिए लगातार प्रयत्न कर रहे थे इसके बाद उन्होंने एक षड्यंत्र रचा इसके तहत बलबन को पद से हटा दिया गया और उनकी जगह एक मुसलमान को पद प्रदान किया गया बलबन जब पद से हटा दिए गए थे तभी वह अपने पद को वापस पाने के लिए तरह-तरह लोगों से संपर्क कर रहे थे जो उनका सहयोग करें इस तरह से बलवन ने अपने साथ बहुत से लोगों को किया और कुछ सालों में ही बलवन अपने विरोधियों पर विजय पाने में सफल रहे इसके कुछ समय बाद ही सुल्तान ने उस मुस्लिम को बर्खास्त कर दिया और उनके साथ ही और भी विरोधीयो को भी समाप्त कर दिया गया और बलबन ने अपना पद प्राप्त किया.

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कुछ समय बाद 1965 में जब सुल्तान महमूद की मृत्यु हुई तो गयासुद्दीन बलबन ने शासन किया और सुल्तान के पद पर आश्रित हुए इस तरह से उन्होंने लगभग 20 साल  तक राज्य किया कुछ लोगो का ये भी कहना है की बलबन ने महमूद को जहर देकर मार डाला था इसके बाद उन्होंने उसके पुत्रों को की भी हत्या कर दी थी क्योंकि वह अपने रास्ते को एकदम साफ करना चाहता था लेकिन इसका कोई पुख्ता प्रमाण भी नहीं है गयासुद्दीन बलबन के बारे में एक और बात प्रसिद्ध है कि वह मुसलमानों का सम्मान तो करते थे लेकिन अपने कार्यों में उनको किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं करने देते थे. उन्होंने अपने राज्य की सुरक्षा के लिए सीमांत क्षेत्रों में दुर्गों का निर्माण भी किया था और उनमें बहुत सारे सैनिकों को नियुक्त भी किया था जिस वजह से राज्य की सुरक्षा हो सके और आतंकियों से अपने राज्य को बचाया जा सके.
एक समय था की इनके राज का मुकाबला मंगोल से था.मंगोल की सेना ने इनके बड़े लड़के मुहम्मद को चारों ओर से घेर लिया था जिस वजह से इनके बड़े लड़के की मृत्यु हो गई थी और ग्यासुद्दीन बलबन इस सदमे को झेल नहीं पाए इससे पहले उन्होंने अपने छोटे लड़के को रज्य को सँभालने का आदेश दिया और 80 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई.

बलवान एक कुशल शासक तो था वह अपने साहसी कार्यों के लिए जाना जाता था उसने अपने जीवन में मेहनत से लगातार उन्नति की थी लेकिन इसी के साथ वह दूसरी ओर स्वतंत्रता आंदोलन का भी क्रूरतापूर्वक दमन किया करता था ऐसा भी सुना गया है की बलवन ने बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों की हत्या कर दी थी.

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