पृथ्वीराज चौहान की कहानी Prithviraj chauhan biography in hindi

Prithviraj chauhan biography in hindi

हेलो कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे महान इन्सान के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने अपने देश के लिए काफी कुछ किया है आज हम पड़ेंगे Prithviraj chauhan biography in hindi तो चलिए जानते हैं इनके बारे में

Prithviraj chauhan biography in hindi
Prithviraj chauhan biography in hindi

Image source- https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Prithviraj_Chauhan_Memorial_by_Ameya_Clicks.jpg

पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1149 में अजमेर में हुआ था उनके पिता का नाम उत्तर राजसोमेश्वर चौहान था और इनकी माता का नाम कमलादेवी था पृथ्वीराज चौहान की का जन्म उनके माता-पिता के विवाह के लगभग 12 साल बाद हुआ था.पृथ्वीराज चौहान के जन्म के साथ ही उनके राज्य के दुश्मनों ने उन पर काफी हमला किए लेकिन काफी मुसीबतों के बाद पृथ्वीराज चौहान बच गए लेकिन जब वह 11 साल के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई इस वजह से इन्हें अपने राज्य को बचपन से ही संभालना पड़ा.पृथ्वीराज चौहान एक बहुत ही पराक्रमी राजा थे वह सिर्फ आवाज सुनकर ही सही से निशाना लगा सकते थे.बहुत से राजाओं को उन्होंने पराजित किया था.सुना है कि एक बार उन्होंने बिना किसी अस्त्र शस्त्र के शेर का भी शिकार किया था ये एक महान साहसी राजा थे उनकी प्रेम कहानी भी काफी प्रसिद्ध है.

पृथ्वीराज चौहान के पराक्रमी होने के कारण रानी संयोगिता को उनसे प्यार हो गया और पृथ्वीराज चौहान भी उन्हें बिना देखे ही प्यार करने लगी लेकिन संयोगिता के पिता को ये बिल्कुल भी पसंद नहीं थे. एक समय की बात है कि संयोगिता के पिता ने एक स्वयंवर रखा जिसमें शर्त रखी की इसमें जो भी जीतेगा उससे संयोगिता की शादी करवाई जाएगी किन स्वयंवर में संयोगिता के पिता ने राजा पृथ्वीराज चौहान को नहीं बुलवाया और पृथ्वीराज चौहान की प्रतिमा द्वार के बाहर द्वारपाल की तरह रखवा दी.जब पृथ्वीराज चौहान को यह बात पता लगी तो उन्हें बहुत ही बुरा लगा उन्होंने राजकुमारी संयोगिता की सहमति से उनका अपहरण कर लिया.जब संयोगिता के पिता को ये बात लगी तो उन्हें बहुत ही बुरा लगा और वह पृथ्वीराज चौहान के दुश्मन बन गए इसके बाद दिल्ली आकर उन दोनों का पूरी विधि पूर्वक विवाह हुआ.पृथ्वीराज चौहान अपने राज्य को विस्तारित करना चाहते थे इस वजह से उन्होंने अपने राज्य का विस्तार फैलाने के लिए पंजाब को चुना.

पंजाब में मोहम्मद शहाबुद्दीन गोरी का शासन था उन्होंने अपनी कुशल सेना के साथ वहां पर आक्रमण कर दिया इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को भी नुकसान उठाना पड़ा और अंत में गोरी भी अधूरे से हो गए परंतु उनकी एक सैनिक ने उनकी किसी तरह से जान बचाई और उनका उचित उपचार करवाया इसके कुछ समय बाद ही मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान का दूसरा युद्ध हुआ दरअसल संयोगिता के पिता राजा पृथ्वीराज चौहान से किसी तरह बदला लेना चाहते थे उन्होंने गौरी को उनके खिलाफ भड़काया और दूसरा युद्ध करवाया इस दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की हार हुई और पृथ्वीराज चौहान और उनके मित्र को बंदी बना लिया गया.

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इसके बाद उन दोनों को तरह-तरह की यातनाये दी गयी. उनकी आंखें गर्म लोहे के सरिए से फ़ोड़ दी गई कुछ समय बाद पृथ्वीराज चौहान ने गौरी की हत्या कर दी और फिर दोनों ने एक दूसरे को खत्म कर दिया.पृथ्वीराज चौहान को अफगानिस्तान में दफनाया गया इसी बीच उनकी कब्र को भारत लाने के लिए भी कई प्रयत्न किए गए लेकिन यह संभव नहीं हो सका फिर शेर सिंह राणा अपने राजा की कब्र की खोज में अफगानिस्तान निकल गए और उन्होंने अपने राजा की कब्र खोदी और किसी तरह भारत लेकर आ गए और इसके बाद भारत में महान पराक्रमी पृथ्वीराज चौहान का अंतिम संस्कार किया गया.

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