राजा परीक्षित की कहानी Raja parikshit katha in hindi

Raja parikshit katha in hindi

Raja parikshit katha in hindi-दोस्तों राजा परीक्षित पांडवों के पोत्र थे वह अपनी प्रजा का बहुत ही ख्याल रखते थे,ऋषि मुनियों की सुरक्षा किया करते थे एक समय की बात है कि राजा परीक्षित जंगल की ओर जा रहे थे तभी उनकी मुलाकात कलयुग से हुई जब कलयुग ने राजा परीक्षित से कहा कि महाराज आपके पूरे राज्य में अब मैं कलयुग चारों ओर रहूँगा तभी राजा परीक्षित कहने लगे कि मेरे होते हुए मैं कलयुग को इस पृथ्वी पर नहीं आने दूंगा तुझे मेरे साथ युद्ध करना पड़ेगा

Raja parikshit katha in hindi
Raja parikshit katha in hindi

ऐसा सुनकर कलयुग कहने लगा कि महाराज अब आप ही मुझे कोई ऐसा स्थान बताएं जहां पर मैं निवास कर सकूं तो कलयुग की बात सुनकर राजा परिक्षित ने कहा कि तुम जुआ खेलने वाली जगह पर,पराई स्त्री के साथ दुर्व्यवहार की जाने वाली जगह,मद्यपान की जाने वाली जगह पर निवास करो इस पर कलयुग ने कहा कि महाराज यह जगह तो सीमित है तब राजा परीक्षित ने कलयुग को सोने में भी रहने का वरदान दिया इसके बाद kalyug राजा के मुकुट में उपस्थित सोने मैं बस गया अब राजा वहां से जंगल की ओर आगे बढ़ रहा था तभी उन्हें जोर की प्यास लगी पानी की तलाश में इधर उधर भटक रहे थे तभी उन्हें एक ऋषि की कुटिया दिखाई दी वह अंदर गए तो उन्हें ऋषि तपस्या करते हुए दिखे उन्होंने उस ऋषि से कई बार पानी मांगा लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया तभी राजा परीक्षित के मुकुट में बैठा हुआ कलयुग ने राजा परीक्षित की बुद्धि घुमा दी और जिस कारन पास में ही मरे हुए सांप को उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया और राजा वहां से चले गए जब यह सब बात उस ऋषि के पुत्र को पता लगी तो उन्होंने राजा परीक्षित को श्राप दिया कि सातवें दिन कश्यप सांप के काटने से राजा परीक्षित की मृत्यु हो जाएगी जब राजा अपने राज महल पहुंचे और उन्होंने अपना मुकुट अपने सिर से उठाया तो उन्हें अपनी गलती का पछतावा हुआ.

इधर जब ऋषि को पता लगा कि मेरे बेटे ने राजा परीक्षित को श्राप दे दिया है तो वह उसी समय राजा परीक्षित के राज महल में जा पहुंचे उन्होंने पूरी बात राजा परीक्षित को कह सुनाई तभी राजा परीक्षित उस ऋषि से कहने लगे कि महात्मा मेरे पास सिर्फ 7 दिन बचे हैं इन 7 दिनो में मुझे ऐसा क्या काम करना चाहिए जिससे मेरा लोक परलोक सुधर जाए तभी उस महर्षि ने उन्हें भागवत कथा को सुनने को कहा.
राजा परीक्षित ने अपने आपको बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन वह अपने आपको नहीं बचा पाए सातवें दिन राजा परीक्षित से एक ऋषि मिलने के लिए आए उस ऋषि ने फूल उनको भेट किये उन फूलों में छिपा हुआ सांप ने राजा परीक्षित को डस लिया और राजा परीक्षित की मौत हो गई.

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