गुरु शिष्य की कहानी Guru shishya stories in hindi

Guru shishya stories in hindi

Guru shishya stories in hindi-हेलो दोस्तों कैसे हैं आप सभी,दोस्तों आज हम आपके लिए लाए हैं छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन का एक व्रतांत यानी गुरु शिष्य की कहानी यह आप सभी को वाकई में गुरु के प्रति अपने हर कर्तव्य को निभाने की सलाह देगी तो चलिए पढ़ते हैं हमारे आज के इस जबरदस्त आर्टिकल को

Guru shishya stories in hindi
Guru shishya stories in hindi

छत्रपति शिवाजी महाराज एक राजा थे उनके गुरु समर्थ रामदास स्वामी थे.गुरु समर्थ रामदास स्वामी जी छत्रपति शिवाजी महाराज से बहुत ही प्रेम करते थे उनके सभी शिष्यों को ऐसा लगता था कि शिवाजी महाराज राजा हैं इसलिए गुरुजी उन्हें सबसे ज्यादा प्रेम करते हैं.समर्थ रामदास स्वामी जी अपने सभी शिष्यों का भ्रम दूर करना चाहते थे एक दिन उन्होंने योजना बनाई वह सभी शिष्यों के साथ जंगल की ओर गए.जंगल में वह अपने शिष्यों से भटक गए और एक गुफा में जाकर कराहने लगे और पेट दर्द करने का नाटक करने लगे.धीरे-धीरे उनके सभी शिष्य उन्हें ढूंढते हुए वहां पर आए और गुरु जी को इस तरह कराहते हुए देखकर उन्हें बहुत ही दुख हुआ उन्होंने गुरुजी से इस बारे में बात की तो गुरुजी ने कहा कि मेरा बहुत तेजी से पेट दर्द कर रहा है और इसके बाद गुरुजी ने उन सभी सदस्यों से अपनी इस बीमारी को ठीक करने का उपाय बताया लेकिन जो उपाए उन्होंने बताया उसको सुनकर वह कुछ नहीं कर पाए.

वह सिर्फ एक दूसरे की शक्ल देखकर भहवीत होने लगे तभी सभी शिष्यों के पीछे महाराज सत्रपति शिवाजी भी आए जब उन्होंने अपने गुरु को इस तरह से कराहते हुए देखा तो उन्होंने इस बारे में उनसे पूछा और जब गुरु ने अपनी बीमारी को ख़त्म करने का उपाय बताया तो छत्रपति शिवाजी महाराज बिल्कुल भी नहीं डरे दरअसल उनके गुरु ने बीमारी को सही करने के लिए उनसे कहा था कि तुम एक मादा बाघ का दूध लाओ तभी मेरी बीमारी ठीक हो सकती है ऐसा सुनकर शिवाजी महाराज वहां से निकल पड़े.जंगल में उन्हे एक मादा बाघ दिखी वह चाहते तो आसानी से उससे लड़कर दूध ले सकते थे लेकिन उन्होंने मादा बाघ से विनम्र निवेदन किया और कहा कि मेरे गुरुदेव एक बीमारी से पीड़ित हैं कृपया कर मुझे तुम्हारा दूध लेने दीजिए इस तरह से इतने मीटी बातो और इशारो को समझकर मादा बाघ खुश हो गयी और उसके बाद महाराज छत्रपति शिवाजी ने उनका दूध बर्तन में ले लिया और अपने गुरु के पास आ गए जब गुरु ने देखा तो वह बहुत ही खुश हुए और दूसरे शिष्यों की ओर देखने लगे तो दूसरे शिष्य लज्जाबश दूसरी ओर सिर घुमाने लगे वाकई में महाराज छत्रपति शिवाजी महाराज एक महान शिष्य थे हम सभी को भी अपने गुरु के लिए सब कुछ करना चाहिए उनकी इज्जत करना चाहिए उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए.

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